स्टॉक मार्केट में हलचल नहीं है, पोर्टफोलियो रुका हुआ है या नीचे जा रहा है। बार-बार इन्वेस्टमेंट ऐप देख रहे हैं, कोई सकारात्मक बदलाव नहीं हो रहा है। मन में सवाल यह भी है कि बढ़ती सेविंग को कहां इन्वेस्ट किया जाए ताकि बेहतर रिटर्न मिले। इस डिजिटल युग में लोग अब पारंपरिक निवेश (FD, गोल्ड, रियल एस्टेट) के साथ-साथ निवेश के दूसरे विकल्पों को ट्राई कर रहे हैं। लोग इक्विटी और म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं और अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई कर रहे हैं। डिजिटाइजेशन की वजह से लोगों को बाहर की कंपनियों में निवेश करने का मौका मिल रहा है, लेकिन इस संबंध में निवेशकों को अभी और ज्ञान प्राप्त करने की जरूरत है।
क्या US और UK के मार्केट में पैसा लगाने से बेहतर रिटर्न मिलेगा? अंतरराष्ट्रीय मार्केट कैसे काम करता है? इस तरह के सभी सवालों का जवाब गीतू मोजा के शो 'फाइनेंस के फंडे' के नए एपिसोड में दिया गया है। इस शो में सवालों का जवाब रेणुका जैन (AMFI-रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर) ने दिया है।
अंतरराष्ट्रीय मार्केट में निवेश क्यों जरूरी है?
एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर बेहतर रिटर्न कमाना है तो निवेश के सभी विकल्पों को एक्सप्लोर करना चाहिए, लेकिन सावधानी और एक्सपर्ट की सलाह के साथ। इसका फायदा यह है कि निवेशकों का पोर्टफोलियो डायवर्सिफाई होगा। अगर घरेलू मार्केट घरेलू कारणों की वजह से गिरता है, तो यह चीज हेज के तौर पर काम करती है। रेणुका जैन कहती हैं - "निवेश में अंतरराष्ट्रीय मार्केट एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इससे बाहर की दिग्गज कंपनियों में निवेश करने का मौका मिलता है।" आंकडे की माने तो पैसा भारत के बाहर है। अकेले अमरीका का स्टॉक मार्केट कैप लगभग 52 ट्रिलियन डॉलर का है, जो भारत से कई गुना ज्यादा है।